मेरे बारे में

गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

जन्मदिन की सहृदय शुभांक्षाए



शक्ति हो बुद्धि का विराट सा आकार हो।
आकाश में रहो मगन,प्रसन्नता अपार हो।
विलुप्त हो अशांति संतोष का आधार हो।
कल्पना से हो परे प्रेम का परिवार हो।
वर्ष भर की हंसी ही आज का उपहार हो।
आशीष हो सौभाग्य हो और स्वास्थ्य निर्विकार हो।
- आशीष

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें