एक बार अपना चेहरा तो दिखाया होता,
मेरे कान पास कुछ गुनगुनाया होता,
हर दिन लाखो बार आवाज़ देता था मैं ,
काश एक बार तुमने भी बुलाया होता,
क्या वजह है जो हर रोज़ भीगता हू मैं,
और फिर घंटो कपडे सुखाता हूँ,
घर से निकलते तो भीगते तुम भी,
बस उड़ते बदलो को इशारे से बुलाया होता,
आँखों क पीछे छुपके सोता हू मैं,
एक अँधेरे कोने में अकेले,
कह दिया झट से सुनता नहीं हूँ मैं,
बस एक बार आवाज़ देकर जगाया तो होता,,
रोशनी आती है इन घरों के पीछे से,
जैसे कोई आग के फौवारे जलाता हो,
मैं तो रुक जाता आँखों की चमक से भी,
बस एक बार तुमने पलकों को उठाया तो होता।

awesome bro...liked each and every line
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