मेरे बारे में

मंगलवार, 23 अप्रैल 2019

शनिवार, 2 मार्च 2019

आशा करता हूँ





अनंत अंतहीन हो सुखद हो भय विहीन हो ,
हो अचर  ऊष्मा प्रेम के प्रकश की।

आयु भर  का हर्ष  हो , न एक क्षण  भी व्यर्थ हो ,
हो ये जीवन यात्रा , स्वप्न के आकाश की।

हो रजनी मधु से लिपटी , दिनकर से भी हिम वर्षा  हो,
जेठ में मुस्कान ऐसी , पूस के उस मास  की.

अश्रु  से भीगे आधार हो या कुटिल व्याकुल  समय  हो,
अंत  में बस  हो विजय आत्मा की श्वास की

--आशीष